Monday, 10 December 2012
Sunday, 18 November 2012
Sunday, 22 July 2012
Monday, 26 March 2012
बिखरे से अश'आर
तेरी तलाश में लोग तमाम मिले ,
तू ही ना मिला तेरे हमनाम मिले !
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मेरी जानिब वो कदम बढ़ाए है तो चले है साँसें '
रुके है कदम तो जान सीने से निकल जाए है !
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" शर्मिन्दा हूँ कि वो खफा है '
क्यूँ जिंदा हूँ कि वो खफा है !
माजरा समझ में आता ही नहीं '
किसलिए खफा है क्यूँ खफा है !
मुझी को अब कहलाना था बेवफा '
वो जनता ही नहीं क्या ज़फा है !"
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-------नरेन -----
Wednesday, 7 March 2012
Saturday, 3 March 2012
छुपाये 'नाम'
सोचता हूँ कुछ लिखूं
आज मैं क्या क्या लिखूं ....
लड़कपन के
मासूम ख़याल को ,
स्कूल के कच्चे रास्ते में
इंतजार को ,
कॉपियों के आखरी पन्नों में लिखी,
टेढ़ी -मेढ़ी पंक्तियों में छुपाये 'नाम' को ,
सोचता हूँ कुछ लिखूं
आज मैं क्या क्या लिखूं ....
आया नहीं बताना, न ही आया पाना ,
हाथो की
सुर्ख मेंहदी के निशानों को,
लहुलुहान अरमानों को ,
तेरे जाने को, मेरे खो जाने को ,
सोचता हूँ कुछ लिखूं
आज मैं क्या क्या लिखूं
---नरैन
आज मैं क्या क्या लिखूं ....
लड़कपन के
मासूम ख़याल को ,
स्कूल के कच्चे रास्ते में
इंतजार को ,
कॉपियों के आखरी पन्नों में लिखी,
टेढ़ी -मेढ़ी पंक्तियों में छुपाये 'नाम' को ,
सोचता हूँ कुछ लिखूं
आज मैं क्या क्या लिखूं ....
आया नहीं बताना, न ही आया पाना ,
हाथो की
सुर्ख मेंहदी के निशानों को,
लहुलुहान अरमानों को ,
तेरे जाने को, मेरे खो जाने को ,
सोचता हूँ कुछ लिखूं
आज मैं क्या क्या लिखूं
---नरैन
Friday, 2 March 2012
"ग़म की बारिश ही सही ,इनकार कुछ लाया तो है ,
बहुत है मेरे लिए
के आपने बुलाया तो है !".
" रोशन दुनिया नहीं मुझे तारीकी अज़ीज़ है ,
मेरे भ्रम की दुनिया में तेरा साया तो है ! "”लरजते लब,झुकती निगाह ,बे-लय धड़कन ,
चुपके से दिल में कोई समाया तो है !”
”छलकते पैमाने , खनकती मीनाएं ,मदहोश निगाह -ए-साकी ,
तश्नगी -ए -जीश्त लिए मैखाने में कोई आया तो है ...!”
”टूटे हैं ना झुके हैं , ना मरे हैं , ज़िंदा हैं !
ज़िंदगी तूने खूब आजमाया तो है !!”
Tuesday, 14 February 2012
पानी -पानी !!!
पानी -पानी !!!
सीने पे ज़ख्म लिए तडपी है , रोई है ज़मीं हाय !" पानी -पानी" ,कहीं सैलाबों ने किया है ज़मीं पै ज़िंदगानी को पानी पानी !!!
साकी ने सरे बज़्म नज़र उठा के जरा झुका ली है ,
शराब शराब हुआ पैमानों में कतरा- कतरा, पानी- पानी !!!
ये आज किस ने मेरा मुझ से ही तआरुफ़ करा दिया है 'नरैन'
मौज मौज हुआ है मेरी आँखों का , ठहरा - ठहरा पानी -पानी !!!
----- 'नरैन'
तआरुफ़--- introduction
Tuesday, 10 January 2012
आग़ाज़
कुछ बेतरतीब ख़याल हैं और कुछ नासमझी के वाकयों से ज़िन्दगी के हिस्से में आये हुए तज़ुर्बे हैं. कुछ हसरतों की कतरने हैं, कुछ ज़री वाले ख़्वाब है. जब भी कोई उदास शाम का सिरा खिल उठेगा, मैं उसे अपने लफ़्ज़ों में बांध कर यहाँ टांग दिया करूँगा.
सारा इलज़ाम मेरी शराबखोरी पे क्यों है
तेरी उल्फत में भी कदम मेरा डगमगाया तो है
चिता की लकड़ियाँ क्या जलाएगी मेरे बेजान जिस्म को
उल्फत की आग ने रूह को मेरी ज़िन्दगी भर झुलसाया तो है
भाई की नम आँख देख कर गला मेरा भी भर आया
रंग लहू ने अपना कुछ दिखाया तो है
[पेंटिंग की तस्वीर पिकासो अंकल से बिना इजाज़त इस उम्मीद में ले ली गयी है एक दिन मेरे लफ़्ज़ों में भी ऐसे ही रंग उतर आयेंगे.]
सारा इलज़ाम मेरी शराबखोरी पे क्यों है
तेरी उल्फत में भी कदम मेरा डगमगाया तो है
चिता की लकड़ियाँ क्या जलाएगी मेरे बेजान जिस्म को
उल्फत की आग ने रूह को मेरी ज़िन्दगी भर झुलसाया तो है
भाई की नम आँख देख कर गला मेरा भी भर आया
रंग लहू ने अपना कुछ दिखाया तो है
[पेंटिंग की तस्वीर पिकासो अंकल से बिना इजाज़त इस उम्मीद में ले ली गयी है एक दिन मेरे लफ़्ज़ों में भी ऐसे ही रंग उतर आयेंगे.]
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