डॉ. नरैन का कोना
Wednesday, 7 March 2012
कि दिल बहल जाए...
कि दिल बहल जाए...
तकदीर के सितम से जिस्मेहयात छलनी है
,
पास आओ कि सीने के जख़्म सहल जाए ।
मय
,
मीना
,
साक़ी
,
साज-ए-तरन्नुम
,
बहुत किए जतन कि
दिल बहल जाए ।
ये रात
,
ये सर्द हवा
,
ये तन्हाई
,
ये जुदाई
,
कँधे चार हो गये बस दम निकल जाए
l
---
नरैन
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