तकदीर में नहीं तू ,जिसमे हो तू शामिल
कुछ ऐसा अपना नसीब लिख दूँ तो चलूँ
खुदा की इबादत में तेरा नाम
ऐ मेरे हबीब लिख दूँ तो चलूँ
मेरा दिल ही ना हुआ मेरा , दुआएं तमाम
क्या करूँ ,नाम-ए-रकीब लिख दूँ तो चलूँ
रियासत-ए-इश्क़ अपने नाम
एक-दो ज़रीब लिख दूँ तो चलूँ ---नरेन
" दिया कीजिएगा सदाएँ रात रात भर ।
लिया कीजिएगा बलाएँ रात रात भर ।।
फ़र्क
नहीं इश्क़ेबुताँ-ओ-इबादतेख़ुदा मेँ ।।।
किया कीजिएगा दुआएँ रात रात भर "।।।।
¤नरेन¤
प्रेम की बिसात पर...
फ़क़त एक जीत की उम्मीद में
मैं चलता गया हर एक चाल 'अँधी '
कि हल्के 'पत्ते ' देख छोड़ दोगे तुम एक बाजी मेरे लिए
हर बार तुमने पत्ते दिखाने को कहा मगर
हर बार मुझे पत्ते फेंकने पड़े बिना देखे
तुम्हारी जीत के लिए
प्रेम की बिसात पर ..... " नरेन "