प्रेम की बिसात पर...
प्रेम की बिसात पर...
फ़क़त एक जीत की उम्मीद में
मैं चलता गया हर एक चाल 'अँधी '
कि हल्के 'पत्ते ' देख छोड़ दोगे तुम एक बाजी मेरे लिए
हर बार तुमने पत्ते दिखाने को कहा मगर
हर बार मुझे पत्ते फेंकने पड़े बिना देखे
तुम्हारी जीत के लिए
प्रेम की बिसात पर ..... " नरेन "
बेहद मर्मस्पर्शी
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