डॉ. नरैन का कोना
Saturday, 3 March 2012
मजलूम की बददुआ
“
मुद्दतों
पीया
किये
,
किश्तों
में
जिया
किये
,
अब
जो
की
है
तौबा
,
मरना
भी
मुहाल
हुआ
!
मय
न
तू
,
ना
तेरा
गम
,
न
कोई
आरजू
,
ज़िन्दगी
है
या
किसी
मजलूम
की
बददुआ
!
”
---'नरेन'
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