Saturday, 3 March 2012

छुपाये 'नाम'


सोचता हूँ कुछ लिखूं
आज
मैं क्या क्या लिखूं ....

लड़कपन
के
मासूम
ख़याल को ,
स्कूल
के कच्चे रास्ते में
इंतजार
को ,
कॉपियों
के आखरी पन्नों में लिखी,
टेढ़ी
-मेढ़ी पंक्तियों में छुपाये 'नाम' को ,

सोचता
हूँ कुछ लिखूं
आज
मैं क्या क्या लिखूं ....

आया
नहीं बताना, ही आया पाना ,
हाथो
की
सुर्ख
मेंहदी के निशानों को,
लहुलुहान
अरमानों को ,
तेरे
जाने को, मेरे खो जाने को ,

सोचता
हूँ कुछ लिखूं
आज
मैं क्या क्या लिखूं
---नरैन

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