सोचता हूँ कुछ लिखूं
आज मैं क्या क्या लिखूं ....
लड़कपन के
मासूम ख़याल को ,
स्कूल के कच्चे रास्ते में
इंतजार को ,
कॉपियों के आखरी पन्नों में लिखी,
टेढ़ी -मेढ़ी पंक्तियों में छुपाये 'नाम' को ,
सोचता हूँ कुछ लिखूं
आज मैं क्या क्या लिखूं ....
आया नहीं बताना, न ही आया पाना ,
हाथो की
सुर्ख मेंहदी के निशानों को,
लहुलुहान अरमानों को ,
तेरे जाने को, मेरे खो जाने को ,
सोचता हूँ कुछ लिखूं
आज मैं क्या क्या लिखूं
---नरैन
आज मैं क्या क्या लिखूं ....
लड़कपन के
मासूम ख़याल को ,
स्कूल के कच्चे रास्ते में
इंतजार को ,
कॉपियों के आखरी पन्नों में लिखी,
टेढ़ी -मेढ़ी पंक्तियों में छुपाये 'नाम' को ,
सोचता हूँ कुछ लिखूं
आज मैं क्या क्या लिखूं ....
आया नहीं बताना, न ही आया पाना ,
हाथो की
सुर्ख मेंहदी के निशानों को,
लहुलुहान अरमानों को ,
तेरे जाने को, मेरे खो जाने को ,
सोचता हूँ कुछ लिखूं
आज मैं क्या क्या लिखूं
---नरैन

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