तेरी तलाश में लोग तमाम मिले ,
तू ही ना मिला तेरे हमनाम मिले !
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मेरी जानिब वो कदम बढ़ाए है तो चले है साँसें '
रुके है कदम तो जान सीने से निकल जाए है !
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" शर्मिन्दा हूँ कि वो खफा है '
क्यूँ जिंदा हूँ कि वो खफा है !
माजरा समझ में आता ही नहीं '
किसलिए खफा है क्यूँ खफा है !
मुझी को अब कहलाना था बेवफा '
वो जनता ही नहीं क्या ज़फा है !"
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-------नरेन -----





