Saturday, 3 March 2012

मासूम ख़्वाब……



तेरे हाथों में सजे मेंहदी ,मेरे सर पे सेहरा ...,
मेरे
मासूम ख़्वाब पे है, ज़माने का सख्त पेहरा !
पाकीज़गी
--मुहब्बत का अब ये आलम है ,
मुझे
महबूब में नज़र आता है ख़ुदा का चेहरा !!
                             ---'नरेन '

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