Monday, 10 December 2012

"....लबे तब्बसुम से धवल चाँदनी गाने लगे हो "

"चाँद पे तुम महरबाँ नज़र आने लगे हो
इतने कि ख़ुद ही चाँद नज़र आने लगे हो "
"रोशन है तेरे ज़माल से मेरे दोनों जहान
लबे तब्बसुम से धवल चाँदनी गाने लगे हो "
"फिर हुई जा रही है सहर मेरे ख़्वाबों की
फिर तन्हा करके मुझे तुम जाने लगे हो "
* नरेन *

"....इश्क़ में तेरे बदनाम मिले"

"तेरी तलाश में लोग तमाम मिले
तू ना मिला कई तेरे हमनाम मिले"
"रिंद-ओ-नासेह रहबर-ओ -रहनुमां
जो मिले है इश्क़ में तेरे बदनाम मिले"
"मेरी मंज़िल है या तेरा दयार है
जिधर भी देखिए तेरे गुमनाम मिले"
----' नरेन '