Tuesday, 14 February 2012

पानी -पानी !!!


पानी -पानी !!!
सीने पे ज़ख्म लिए तडपी है , रोई है ज़मीं हाय !" पानी -पानी" ,
कहीं सैलाबों ने किया है ज़मीं पै ज़िंदगानी को पानी पानी !!!
साकी ने सरे बज़्म नज़र उठा के जरा झुका ली है  ,
शराब शराब हुआ पैमानों में कतरा- कतरा, पानी- पानी !!!
ये आज किस ने  मेरा मुझ से ही तआरुफ़ करा दिया है  'नरैन'
मौ  मौ हुआ है मेरी आँखों का , ठहरा - ठहरा पानी -पानी !!!
                                                       ----- 'नरैन'

तआरुफ़--- introduction

1 comment:

  1. बहुत अच्छा लिखा है आपने .........

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