"....लबे तब्बसुम से धवल चाँदनी गाने लगे हो "
"चाँद पे तुम महरबाँ नज़र आने लगे हो
इतने कि ख़ुद ही चाँद नज़र आने लगे हो "
"रोशन है तेरे ज़माल से मेरे दोनों जहान
लबे तब्बसुम से धवल चाँदनी गाने लगे हो "
"फिर हुई जा रही है सहर मेरे ख़्वाबों की
फिर तन्हा करके मुझे तुम जाने लगे हो "
* नरेन *
waaah...behad khoobsoorat khyaal
ReplyDeleteजी ...सादर आभार प्रेम लताजी ....आपका कमेन्ट मेरे लिए कीमती है
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