डॉ. नरैन का कोना
Monday, 10 December 2012
"....इश्क़ में तेरे बदनाम मिले"
"तेरी तलाश में लोग तमाम मिले
तू ना मिला कई तेरे हमनाम मिले"
"रिंद-ओ-नासेह रहबर-ओ -रहनुमां
जो मिले है इश्क़ में तेरे बदनाम मिले"
"मेरी मंज़िल है या तेरा दयार है
जिधर भी देखिए तेरे गुमनाम मिले"
----' नरेन '
2 comments:
prem lata
14 April 2013 at 18:56
bahut achha likhte ho waaah
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Narain
21 April 2013 at 09:04
...सादर आभार प्रेम लताजी ....आपकी नज़र-ए -इनायत बनी रहे
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bahut achha likhte ho waaah
ReplyDelete...सादर आभार प्रेम लताजी ....आपकी नज़र-ए -इनायत बनी रहे
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