Monday, 10 December 2012

"....इश्क़ में तेरे बदनाम मिले"

"तेरी तलाश में लोग तमाम मिले
तू ना मिला कई तेरे हमनाम मिले"
"रिंद-ओ-नासेह रहबर-ओ -रहनुमां
जो मिले है इश्क़ में तेरे बदनाम मिले"
"मेरी मंज़िल है या तेरा दयार है
जिधर भी देखिए तेरे गुमनाम मिले"
----' नरेन '

2 comments:

  1. Replies
    1. ...सादर आभार प्रेम लताजी ....आपकी नज़र-ए -इनायत बनी रहे

      Delete